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(ડાઘ… …દેવબાગ, કર્ણાટક, નવે.2008)
नटखट नन्हा चन्दामामा बोला धरतीमा से,
बाल रामने माँगा मुझको, स्कूल न जाउँ कल से ।
बाल रामजी अडे हुए है, अपनी ज़िद्द पर डँटे हुए है,
चन्दा दे दो, चन्दा दे दो, इसी बात को रटे हुए है ।
धरतीमाँ ने बडे प्यार से चन्दा को समझाया,
रामचन्द्र तो खुद ईश्वर है, राज़ ये उसे बताया ।
एँ एँ एँ एँ कर के रोया चन्दा तो बल खा के,
दौडा, भागा, रुका सूरजदादा के संग जा के ।
सूरजदादा सूरजदादा,
बाल राम ने मुज़ को माँगा;
मैं हूँ नन्हा मुन्ना बच्चा,
बडा अभी है मुझ को बनना;
मैं अगर स्कूल जाउँगा,
राम मुझे खा जायेगा ।
दादा ने भी खूब समझाया,
चन्दा की कुछ समज़ न आया ।
रुठ गया वो, भाग गया वो, दूर गगन में उँचे उँचे,
आँख मींच के अकड गया वो, होंठ ज़ोर से भींचे भींचे ।
इधर थाली में दूध डालकर कौशल्या ने चाँद दिखाया,
बाल राम तो चाँद देखकर खिल खिल खिल खिल खूब मुसकाया ।
भींचे होंठ मगर चन्दा के भींचे ही रह गये हंमेशा,
गोरे मुख पर काले धब्बे इसीलिए दिख रहे हंमेशा ।
-विवेक मनहर टेलर
મારા લાડકા સ્વયમ્ ની આજે આઠમી વર્ષગાંઠ અને બોનસમાં બાળદિન પણ… એટલે એક બાળગીત -પાબંદ નઝમ- મારા લાડકાને વર્ષગાંઠની ભેટરૂપે અર્પણ!)
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(દરિયાના મોજાં વચ્ચે સેન્ડવીચ… …સ્વયમ્, ગોવા, નવે.2008)
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